अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले रोकने और कतर की राजधानी दोहा में इस सप्ताह उच्चस्तरीय वार्ता करने पर सहमति जताई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी विवाद का समाधान निकालना और हाल ही में हुए संघर्षविराम को कायम रखना है।
दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब केवल 11 दिन पहले ही कई महीनों से जारी तनाव समाप्त करने के लिए एक अंतरिम समझौते की घोषणा की गई थी। हालांकि यह संघर्षविराम अभी भी नाजुक स्थिति में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों ने फिलहाल सभी सैन्य गतिविधियों और हमलों को रोकने पर सहमति बनाई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी और तकनीकी स्तर की बातचीत भी आगे बढ़ेगी।
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पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन सप्ताहांत में बढ़े सैन्य तनाव के बाद इसका स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। अब वार्ता का मुख्य फोकस होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और सुरक्षा व्यवस्था होगा। अमेरिकी तकनीकी दल के प्रमुख निक स्टीवर्ट भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि प्रारंभिक शांति समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात का प्रबंधन करने का विशेष अधिकार ईरान के पास है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही, अमेरिकी प्रतिबंध हटाने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। दोनों पक्ष भविष्य में किसी भी सैन्य टकराव से बचने के लिए प्रत्यक्ष सैन्य "हॉटलाइन" स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं।
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