अमेरिका के दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने ईरान-अमेरिका शांति समझौते में पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोनों देशों पर आतंकवादी संगठनों से पुराने संबंध रखने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे देशों की मध्यस्थ भूमिका पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए।
यह बयान उस समय सामने आया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरान से जुड़े संभावित शांति समझौते के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए पाकिस्तान और कतर के नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे।
फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि अब सभी को स्पष्ट हो जाना चाहिए कि अमेरिका के वास्तविक मित्र कौन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और कतर का आतंकवादियों को संरक्षण देने का लंबा इतिहास रहा है और वर्तमान में वे सार्थक शांति स्थापित करने की बजाय ईरान के लंबे समय से चल रहे अभियान को समर्थन देने में अधिक रुचि रखते दिखाई देते हैं।
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हालांकि स्कॉट ने यह भी कहा कि अभी भी ऐसा समझौता संभव है जिससे सभी पक्षों को लाभ मिल सके, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
वहीं, मोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने वर्षों तक ओसामा बिन लादेन को शरण दी थी और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) पर भी गंभीर आरोप लगाए।
शीही ने सुझाव दिया कि क्षेत्रीय वार्ताओं में संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि ये देश मध्य पूर्व में अमेरिका के अधिक भरोसेमंद सहयोगी हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल जैसे साझेदारों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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