क्यूबा सरकार ने रविवार (4 जनवरी, 2026) को कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई में 32 क्यूबाई सैन्य और पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई। यह वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हमलों के बाद पहली बार किसी देश द्वारा आधिकारिक रूप से मौतों की संख्या की पुष्टि है।
क्यूबा के सरकारी टेलीविजन पर आधिकारिक बयान के अनुसार, ये क्यूबाई अधिकारी वेनेजुएला सरकार के अनुरोध पर वहां तैनात थे और एक विशेष मिशन पर काम कर रहे थे। हालांकि, वे दक्षिण अमेरिकी देश में किस तरह के कार्य में लगे थे, इसका खुलासा नहीं किया गया। क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला का करीबी सहयोगी रहा है और वर्षों से वहां सैन्य व पुलिस बल भेजता रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “कल बहुत सारे क्यूबाई मारे गए। दूसरी तरफ काफी मौतें हुई हैं, लेकिन हमारी तरफ कोई हताहत नहीं हुआ।” यह बयान उस सैन्य अभियान के बाद आया, जिसमें शनिवार (3 जनवरी, 2026) को अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर मादक पदार्थ तस्करी और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में अभियोजन के लिए पकड़ लिया।
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वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी हमलों में मौतों की बात स्वीकार की है, लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने लोग मारे गए। वहीं, क्यूबा सरकार ने मारे गए अधिकारियों के सम्मान में दो दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो और मौजूदा राष्ट्रपति मिगेल डियाज़-कैनेल ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मृत अधिकारियों के नाम और पदों की जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
क्यूबा के बयान में कहा गया कि ये अधिकारी “सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए साहस और गरिमा के साथ लड़े” और सीधे मुकाबले या बमबारी में शहीद हुए।
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी वेनेजुएला में क्यूबाई भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि मादुरो की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था क्यूबाई अधिकारियों के हाथों में थी और वे ही उनकी सत्ता को सहारा दे रहे थे।
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