वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अमेरिका के नेतृत्व में सत्ता से हटाए जाने के बाद शनिवार (3 जनवरी 2026) को दुनिया भर में रह रहे वेनेजुएला के प्रवासियों में जश्न का माहौल देखने को मिला। लैटिन अमेरिका की कई राजधानियों और स्पेन में सड़कों पर मादुरो की गिरफ्तारी के समर्थन में नारे गूंजे, जहां वेनेजुएलावासी खुशी साझा करने के लिए एकत्र हुए, साथ ही यह सोचते भी नजर आए कि आगे क्या होगा।
चिली की राजधानी सैंटियागो में पिछले सात वर्षों से रह रहीं खाती यानेज ने कहा, “हम आज़ाद हैं। हम सभी खुश हैं कि तानाशाही गिर गई और अब हमारा देश मुक्त है।” वहीं, उनके हमवतन जोस ग्रेगोरियो ने कहा, “इतने सालों की लड़ाई और संघर्ष के बाद आज़ादी का दिन आया है।”
संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, 2014 से अब तक करीब 77 लाख वेनेजुएलावासी—जो देश की आबादी का लगभग 20 प्रतिशत हैं—भोजन की कमी और बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़ चुके हैं। पड़ोसी कोलंबिया में सबसे ज्यादा लगभग 28 लाख वेनेजुएलावासी रहते हैं, जबकि पेरू में उनकी संख्या करीब 17 लाख है।
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पेरू की राजधानी लीमा में दर्जनों वेनेजुएलावासी अपने राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे हुए मादुरो के सत्ता से हटने का जश्न मनाते नजर आए। प्रवासी मिलाग्रोस ओर्तेगा ने कहा कि वह अब अपने देश लौटने की उम्मीद कर रही हैं।
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों लोग पुर्ता डेल सोल पर इकट्ठा हुए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस को तालियों के साथ देखा। वहीं, इक्वाडोर और अर्जेंटीना में भी जश्न के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हालांकि शुरुआती खुशी के बाद वेनेजुएला के भविष्य को लेकर आशंकाएं भी सामने आईं। कई प्रवासियों ने कहा कि यह बदलाव एक शुरुआत है, लेकिन देश को पूरी तरह आज़ाद होने में अभी समय लगेगा। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सुरक्षित और व्यवस्थित सत्ता परिवर्तन तक वेनेजुएला को अस्थायी रूप से अमेरिकी नियंत्रण में रखा जाएगा।
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