बांग्लादेश के प्रमुख सनातनी हिंदू धार्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास की कानूनी टीम ने उनकी रिहाई की प्रक्रिया में कथित रूप से जानबूझकर देरी किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बचाव पक्ष का आरोप है कि राज्य तंत्र लगातार नए मामलों को जोड़कर उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने का प्रयास कर रहा है।
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे बांग्लादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। 27 नवंबर 2024 को चट्टोग्राम न्यायालय परिसर के बाहर उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी हुई थीं, जिसने देशभर का ध्यान इस मामले की ओर खींचा था।
चिन्मय कृष्ण दास की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि उनके मुवक्किल को मूल राजद्रोह मामले में जमानत मिलने के बावजूद रिहाई नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद लगातार नए मामले दर्ज किए गए, जिससे उन्हें जेल में ही रखा जा सके। उनके अनुसार यह प्रक्रिया न्यायिक कारवाई को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने का प्रयास प्रतीत होती है।
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बचाव पक्ष का कहना है कि चिन्मय कृष्ण दास को केवल मूल मामले में ही नहीं, बल्कि बाद में दर्ज किए गए कई अन्य मामलों में भी अदालत से जमानत मिल चुकी है। इसके बावजूद नए आरोपों की श्रृंखला के कारण वह अब भी कारागार में बंद हैं। अधिवक्ता ने इसे अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले एक प्रमुख धार्मिक नेता के साथ न्याय में देरी का मामला बताया।
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में सनातनी हिंदू समुदाय के प्रमुख प्रवक्ताओं में माने जाते हैं और लंबे समय से अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। उनके मामले को लेकर देश और विदेश में विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है। फिलहाल उनकी कानूनी टीम न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने और सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग कर रही है।
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