दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका की ओर से लगाए गए नए व्यापार प्रतिबंधों और टैरिफ के जवाब में चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने, ड्रोन निर्यात नियमों को सख्त करने और कई नई व्यापारिक जांच शुरू करने की घोषणा की है।
चीन ने बुधवार को इन जवाबी कदमों का ऐलान किया। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक व्यापार नीति के तहत चीन समेत कई देशों पर लगाए गए नए टैरिफ के बाद की गई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये शुल्क व्यापार असंतुलन को सुधारने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका पर बीजिंग के वैध आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी कदमों से चीन के अधिकारों और हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इसके जवाब में चीन को आवश्यक कदम उठाने पड़े हैं, जिसमें ड्रोन और उनके महत्वपूर्ण उपकरणों तथा तकनीक के निर्यात नियंत्रण को मजबूत करना शामिल है।
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चीन की प्रतिबंध सूची में छह अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं, जिनमें जैव प्रौद्योगिकी कंपनी एप्लाइड डीएनए साइंसेज और भू-विज्ञान अनुसंधान कंपनी स्ट्रेटम रिजर्वायर शामिल हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, अब चीनी संस्थाएं इन कंपनियों के साथ व्यापार, सहयोग या अन्य गतिविधियां नहीं कर सकेंगी।
बीजिंग ने अमेरिकी कंपनियों पर शिनजियांग से जुड़े मामलों में कथित रूप से प्रतिबंधों का समर्थन करने का आरोप लगाया है। शिनजियांग क्षेत्र को लेकर अमेरिका लंबे समय से चीन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन इन आरोपों को खारिज करता है।
इसके अलावा चीन ने अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी कई अन्य नियामक कार्रवाइयों की भी घोषणा की है। इनमें अमेरिकी अनुपालन जांच कंपनियों को काली सूची में डालना और कार्यालय उपकरणों के आयात की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शामिल है।
हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, लेकिन बातचीत के रास्ते अभी खुले हुए हैं। चीन के वरिष्ठ व्यापार अधिकारी हे लिफेंग ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से बातचीत कर नए अमेरिकी प्रतिबंधों पर बीजिंग की चिंता जताई।
यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा प्रस्तावित है। इससे पहले दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत के बाद संबंधों में कुछ सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन नए व्यापारिक कदमों ने तनाव फिर बढ़ा दिया है।
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