कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने यह मांग भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर की है, जिसमें बड़े पैमाने पर डेटा में हेरफेर, वित्तीय कुप्रबंधन और निगरानी की कमी की ओर इशारा किया गया है।
सोमवार (12 जनवरी, 2026) को यहां आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता कन्नन गोपीनाथन ने पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के सीएजी ऑडिट का हवाला दिया। यह ऑडिट वर्ष 2015 से 2022 की अवधि को कवर करता है और इसमें शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (एसटीटी), रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) और स्पेशल प्रोजेक्ट्स (एसपी) की जांच की गई है।
कन्नन गोपीनाथन ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में लाभार्थियों के डेटा से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, रिपोर्ट में पाया गया कि 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते फर्जी निकले, 96 प्रतिशत मामलों में मोबाइल नंबर गलत या फर्जी थे, जबकि 97 प्रतिशत मामलों में असेसर (मूल्यांकनकर्ता) से जुड़ी जानकारियां धोखाधड़ीपूर्ण पाई गईं।
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कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इतने बड़े स्तर पर अनियमितताएं योजना के क्रियान्वयन में कमजोर निगरानी और जवाबदेही की कमी को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि पीएमकेवीवाई जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाना है, लेकिन यदि लाभार्थियों का ही डेटा फर्जी हो, तो योजना के उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गोपीनाथन ने यह भी कहा कि सीएजी ने फंड के उपयोग, पात्रता मानदंडों के पालन और परियोजनाओं की निगरानी में कई खामियां दर्ज की हैं। कांग्रेस ने मांग की कि इन निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पार्टी ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए।
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