हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने सलाहकारों, विधायकों और आयोगों, निगमों तथा प्रशासनिक निकायों के शीर्ष अधिकारियों को दी गई कैबिनेट रैंक वापस लेने का फैसला किया है। इस फैसले का असर सात वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर पड़ा है, जिनमें तीन विधायक शामिल हैं।
इन सात वरिष्ठ नेताओं को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिसंबर 2022 में सरकार गठन के तुरंत बाद कैबिनेट रैंक प्रदान किया था। सरकार इन नेताओं के वेतन और भत्तों पर हर साल लगभग 85 लाख रुपये खर्च कर रही थी।
एक अधिकारी ने बताया, "हम अभी उनके वेतन और अन्य भत्तों की 20 प्रतिशत रोक के कारण होने वाली बचत का आकलन कर रहे हैं। लेकिन इन नेताओं को अब सुरक्षा, घर के घरेलू कर्मचारी और गाड़ी समेत अन्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी।"
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इस कदम को राज्य में सरकारी खर्चों में कटौती और कैबिनेट रैंक की नीति को सामान्य करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय पार्टी के भीतर और विपक्ष दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फैसले से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के बीच आंतरिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का तर्क है कि यह कदम सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था।
इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट रैंक रद्द करने के इस निर्णय ने राजनीतिक चर्चा को बढ़ा दिया है और यह स्पष्ट किया है कि सरकार वरिष्ठ नेताओं को मिलने वाली विशेष सुविधाओं को पुनर्व्यवस्थित कर रही है।
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