अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति समझौते से पीछे हटने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करने के फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और वॉशिंगटन अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।
एक साक्षात्कार में जब ट्रंप से ईरान के समझौते से हटने के फैसले पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।" उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
ट्रंप ने कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।
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इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने खुज़ेस्तान प्रांत के अहवाज़ शहर में एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे पर अमेरिका की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर लगातार आठवीं रात हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये कार्रवाई व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद की गई।
अमेरिका ने हाल ही में जॉर्डन में हुए हमले के जवाब में ईरान पर नए हवाई हमले किए हैं। इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि एक सैनिक लापता और चार घायल हुए थे।
वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन ने हमले जारी रखे तो उसे "यादगार सबक" मिलेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर को "बेकार और अमान्य" बताया।
ईरानी नेता का बयान उस समय आया जब तेहरान ने अंतरिम समझौते से पीछे हटने की घोषणा की। ईरान ने अमेरिका पर समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि वह किसी भी दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव से मध्य-पूर्व में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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