दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी दिल्ली) के 40 वर्षीय पीएचडी छात्र की इलाज के दौरान मौत के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। छात्र को अगस्त में मुनिरका गांव स्थित उसके किराए के मकान में बेहोशी और घायल अवस्था में पाया गया था। पुलिस के मुताबिक, वह 45 दिनों से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा।
पुलिस ने बताया कि 18 अगस्त को छात्र अपने किराए के घर के अंदर बेहोश और घायल मिला था। मकान का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पड़ोसियों ने तोड़कर खोला। इसके बाद छात्र को तत्काल एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, 4 अक्टूबर को किशनगढ़ थाने में यह मामला दर्ज किया गया। एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आईआईटी के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के बाद दर्ज की गई।
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दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान परिवार या किसी गवाह ने किसी व्यक्ति पर संदेह या आरोप नहीं लगाया था। पुलिस ने कहा कि घटना के समय छात्र घर में अकेला था। मकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से भी उसके अकेले होने की बात सामने आई है।
इससे पहले आईआईटी दिल्ली परिसर में एक अन्य छात्र की मौत के बाद भी जांच समिति गठित की गई थी। 22 अगस्त को 31 वर्षीय एमएससी छात्र की कथित तौर पर इमारत से कूदने के बाद मौत हो गई थी।
इस मामले की जांच के लिए आईआईटी दिल्ली ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। इसमें एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शरण, चार छात्र प्रतिनिधि और रजिस्ट्रार शामिल हैं।
संस्थान ने समिति से दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था। आईआईटी दिल्ली ने मृत छात्र के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के योगदान से आर्थिक सहायता देने की बात भी कही थी।
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