असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सिलचर नगर निगम चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की शानदार जीत के बाद कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी हार गई है। सिलचर असम का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां पहली बार नगर निगम चुनाव कराए गए थे।
सिलचर नगर निगम की कुल 42 सीटों में से एनडीए ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें भाजपा ने 32 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) को दो सीटें मिलीं। कांग्रेस को केवल दो सीटों पर सफलता मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने छह वार्डों में जीत हासिल की।
चुनाव के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में सिलचर की जनता ने एनडीए को भारी बहुमत दिया है। उन्होंने इस जनादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकसित भारत के लिए उनकी शहरी शासन संबंधी सोच में जनता के विश्वास से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने सिलचर को असम के प्रमुख शहरों में शामिल करने का वादा भी दोहराया।
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असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने भी परिणामों को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी का आरोप लगाती है, लेकिन सिलचर में चुनाव बैलेट पेपर से हुआ और पार्टी को यहां भी पर्याप्त जनसमर्थन नहीं मिला। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विकास एजेंडे में जनता के विश्वास का संकेत बताया।
भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में सौरव कांति नाथ, शिवानी रानी दास, मोहितोष चंद्र मंडल, रानू दास, जॉय दास, सुमोना दास, चंद्रिमा देब, कुलदीप चौधरी, मृणालिनी सिन्हा, सुस्मिता पुरकायस्थ, उत्तम कुमार गोला और पंथदीप रॉय शामिल हैं।
चुनाव में अंतिम मतदान प्रतिशत 70.22 प्रतिशत रहा। 42 में से 40 वार्डों में 3 अक्टूबर को मतदान हुआ, जबकि वार्ड 9 और 20 में भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह और भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध चुने गए।
सिलचर नगर बोर्ड को 2022 में 42 वार्ड वाले नगर निगम में बदला गया था, जो जून 2025 में अस्तित्व में आया। बराक घाटी का प्रमुख शहर करीब छह वर्षों तक निर्वाचित नगर निकाय से वंचित रहा था।
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