भारत और यूरोपीय संघ (EU) दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहे हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर अभी भी अंतिम सहमति बनना बाकी है। यूरोपीय नेताओं के भारत पहुंचने से 72 घंटे से भी कम समय पहले तक व्यापार समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर गहन बातचीत जारी है।
यह शिखर सम्मेलन 27 जनवरी को प्रस्तावित है, जिसमें जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा, बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है।
भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा पिछले दो दशकों से चल रही है, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। इसकी प्रमुख वजह कृषि क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशीलताएं, कार्बन बॉर्डर टैक्स, सेवा क्षेत्र में पहुंच, और गैर-शुल्क बाधाएं मानी जा रही हैं। इन मुद्दों पर दोनों पक्ष अपने-अपने हितों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
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व्यापार के अलावा, अगले सप्ताह के एजेंडे में एक नया रक्षा और सुरक्षा साझेदारी समझौता, सूचना सुरक्षा पर एक करार तथा एक मोबिलिटी फ्रेमवर्क पर समझौता ज्ञापन (MoU) भी शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक विश्वास को मजबूत करना और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटना है। कुल मिलाकर, यह शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
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