प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को कहा कि भारत एक दृढ़ और संकल्पवान राष्ट्र के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है और वह अपनी शक्ति को बढ़ाना, उसे जिम्मेदारी से प्रबंधित करना और सही समय पर उपयोग करना जानता है। प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मनाए जा रहे ‘पराक्रम दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से जुड़े इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक कमजोर राष्ट्र अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाता, इसी कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस हमेशा एक मजबूत भारत का सपना देखते थे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत भी एक शक्तिशाली और दृढ़ राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने उन लोगों के घरों में घुसकर जवाब दिया, जिन्होंने देश को चोट पहुंचाई थी, और उन्हें नष्ट किया। उन्होंने कहा, “आज भारत जानता है कि शक्ति कैसे बढ़ाई जाती है, उसे जिम्मेदारी से कैसे संभाला जाता है और उसका प्रयोग कैसे किया जाता है।”
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उन्होंने बताया कि नेताजी के आत्मनिर्भर और मजबूत भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर लगातार काम कर रही है। पहले भारत हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भर था, लेकिन आज भारत का रक्षा निर्यात 23,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल और अन्य हथियार वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण आत्मनिर्भरता के बल पर कर रहा है।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को उचित सम्मान न देने का आरोप लगाया और कहा कि आज़ादी के बाद देश के गौरवशाली इतिहास की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि अंडमान-निकोबार द्वीपों की पहचान को औपनिवेशिक नामों से मुक्त कर उनकी सरकार ने ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त किया। पोर्ट ब्लेयर का नाम अब ‘श्री विजयपुरम’ किया गया है और कई द्वीपों को स्वराज, शहीद और सुभाष द्वीप जैसे नाम दिए गए हैं, जो स्वतंत्र भारत की पहचान को मजबूत करते हैं।
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