ईरान में हाल ही में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक कार्रवाई जारी है। एक महीने पहले शुरू हुई सख्त कार्रवाई के बाद अब पूरे देश में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
बताया गया है कि सुरक्षा एजेंसियां रात के समय घरों पर छापे मार रही हैं और संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले रही हैं। कई मामलों में लोगों को उनके मोबाइल फोन के पासवर्ड देने के लिए मजबूर किया गया और फिर उन्हें अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया। गिरफ्तार लोगों में छात्र, डॉक्टर, वकील, शिक्षक, कलाकार, व्यवसायी और खिलाड़ी शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कई लोगों को हफ्तों तक परिवार और वकीलों से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तारियों की संख्या 50,000 से अधिक हो सकती है, हालांकि स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करना मुश्किल है क्योंकि सरकार ने इंटरनेट प्रतिबंध लागू कर रखा है।
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विरोध प्रदर्शन दिसंबर के अंत में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए थे और जनवरी की शुरुआत में देश के 190 से अधिक शहरों में फैल गए। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं।
ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख घोलमहुसैन मोहसेनी एजेही ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” बताते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं नागरिक समूह लगातार सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार जारी रहा तो अमेरिका कड़ा कदम उठा सकता है।
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