कर्नाटक सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति पंजीकरण को प्रभावित कर रही e-Swathu (ई-एसेट्स) 2.0 सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी खामियों को लेकर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को पत्र लिखा है। यह जानकारी राज्य के ग्रामीण विकास और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खड़गे ने बुधवार को विधानसभा में दी।
मंत्री ने बताया कि e-Swathu 2.0 सॉफ्टवेयर को राज्य में 1 दिसंबर 2025 को लागू किया गया था, लेकिन इसके बाद से ही नागरिक इंटरफेस से जुड़ी कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिनके कारण ग्रामीण इलाकों में संपत्तियों का पंजीकरण बाधित हो रहा है।
प्रियंक खड़गे ने विधानसभा में कहा, “माननीय केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री को पत्र लिखकर e-Swathu 2.0 सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र समाधान और शेष मॉडल को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने का अनुरोध किया गया है।”
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उन्होंने बताया कि राज्य का ग्रामीण विकास विभाग इन तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के साथ समन्वय में काम कर रहा है, ताकि सॉफ्टवेयर को सुचारु और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जा सके।
e-Swathu 2.0 के नागरिक इंटरफेस में सामने आई प्रमुख समस्याओं में भूमि मापन इकाइयों का रूपांतरण शामिल है। कर्नाटक में पारंपरिक रूप से भूमि को गुंटा और सेंट में मापा जाता है, जबकि e-Swathu 2.0 सॉफ्टवेयर में डिफॉल्ट रूप से वर्ग मीटर का उपयोग किया जा रहा है। इससे ग्रामीण संपत्ति मालिकों को विवरण दर्ज करने और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार का कहना है कि इन तकनीकी खामियों के कारण आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण किसानों और संपत्ति धारकों को परेशानी हो रही है। सरकार ने केंद्र से शीघ्र हस्तक्षेप कर सॉफ्टवेयर को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारने की मांग की है, ताकि डिजिटल संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
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