ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने एक भारतीय आईटी छात्र और पार्ट-टाइम उबर ड्राइवर को संपत्ति से जुड़ी बड़ी धोखाधड़ी के मामले में दो साल की जेल की सजा सुनाई है। आरोपी ने खुद को एक वकील बताकर एक मकान खरीदार से 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹1.28 करोड़) से अधिक की ठगी की थी। रिपोर्ट के अनुसार, 28 वर्षीय प्रदीप छात्र वीज़ा पर ऑस्ट्रेलिया में रह रहा था।
अदालत ने प्रदीप को धोखे से संपत्ति हासिल करने और अपराध की कमाई संभालने का दोषी ठहराया। इस ठगी के कारण पीड़ित व्यक्ति मानसिक रूप से आहत हो गया और आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट गया। जांच एजेंसियां ठगी गई राशि में से केवल 900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही बरामद कर सकीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदीप ने सिडनी की एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म की नकली वेबसाइट तैयार की और उसी के नाम से मिलती-जुलती ईमेल आईडी बनाकर पीड़ित से संपर्क किया। अक्टूबर 2024 में पीड़ित ने एक असली रियल एस्टेट लॉ फर्म से संपर्क किया था, लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान प्रदीप ने खुद को शामिल कर लिया। ईमेल इतने असली लग रहे थे कि पीड़ित को कोई शक नहीं हुआ।
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इसके बाद आरोपी ने उसी नाम से मिलती-जुलती एक कंपनी भी रजिस्टर कराई और वेस्टपैक बैंक में बिज़नेस अकाउंट खुलवाया। उसने मकान खरीद और स्टांप ड्यूटी के नाम पर पीड़ित को पैसे ट्रांसफर करने को कहा। भरोसा कर पीड़ित ने कुल 2,09,874 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भेज दिए। जब पीड़ित ने असली वकील से संपर्क किया, तब जाकर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी की अधिकांश रकम से आरोपी ने सोना खरीदा था, जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी मिली। अदालत ने माना कि यह अपराध पूरी योजना और पूर्व-नियोजन के साथ किया गया। लिवरपूल लोकल कोर्ट ने आरोपी को दो साल की जेल और 14 महीने की न्यूनतम सजा सुनाई। रिपोर्ट के अनुसार, रिहाई के बाद उसे ऑस्ट्रेलिया से निर्वासित किया जा सकता है।
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