नेपाल में राजनीतिक संबद्धता को लेकर बढ़ते सवालों के बीच ऊर्जा, भौतिक अवसंरचना और शहरी विकास मंत्री कुलमान घिसिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह सितंबर 2025 में हुए जेन-Z आंदोलन के बाद गठित “अंतरिम तटस्थ सरकार” में शामिल किए गए थे। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली इस अंतरिम मंत्रिपरिषद में घिसिंग को तीसरा सबसे प्रभावशाली मंत्री माना जाता था।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख रहे कुलमान घिसिंग को देश में वर्षों से चली आ रही बिजली कटौती (लोडशेडिंग) समाप्त करने का श्रेय दिया जाता है, जिसके कारण उन्हें मंत्रिमंडल का “पावर मैन” कहा जाता था। हालांकि, उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर स्वयं अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सवाल उठाए थे। आरोप था कि वह पर्दे के पीछे एक राजनीतिक दल का संचालन कर रहे थे, जो तटस्थ सरकार की भावना के खिलाफ था।
दिसंबर 2025 में घिसिंग ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और अपनी पार्टी उज्यालो नेपाल पार्टी के बीच विलय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उज्यालो नेपाल पार्टी का गठन जेन-Z आंदोलन के बाद हुआ था। हालांकि घिसिंग का दावा रहा कि इस समझौते को औपचारिक रूप से अभी लागू नहीं किया गया है। बुधवार (7 जनवरी 2026) देर रात अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक किसी भी राजनीतिक दल की औपचारिक सदस्यता नहीं ली है।
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इसके बावजूद, विलय समझौते के बाद वह आरएसपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बन गए और उनकी पार्टी के 14 लोगों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व की सूची में शामिल किया गया। इसके बाद से ही अंतरिम सरकार में उनके बने रहने को लेकर दबाव बढ़ता गया। प्रधानमंत्री कार्की ने भी स्पष्ट किया कि जो मंत्री आगामी मार्च चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें पद छोड़ना होगा।
जेन-Z आंदोलन के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनावों तक के लिए यह अंतरिम सरकार बनाई थी। कुलमान घिसिंग ने 115 दिनों तक मंत्री रहने के बाद अब मंत्रिमंडल छोड़ दिया है।
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