ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के झूठे दावों और दुष्प्रचार की पोल खुल गई है। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि भारतीय वायु हमलों के बीच पाकिस्तान मदद के लिए अमेरिका के पास दौड़ पड़ा था। इन दस्तावेजों के अनुसार, इस्लामाबाद को डर था कि भारत द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान केवल “रोका गया” है और किसी भी समय दोबारा शुरू हो सकता है।
The Indian Witness द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेजों में बताया गया है कि पाकिस्तान की ओर से लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बोग्स ने अमेरिका में यह संदेश फैलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने सैन्य कार्रवाई सिर्फ अस्थायी रूप से रोकी है। पाकिस्तान को आशंका थी कि भारतीय हमले फिर से उसके सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों को निशाना बना सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर मई महीने में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हत्या कर दी थी। 7 मई को हुए भारतीय हमलों में पाकिस्तान के भीतर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ दिनों तक तनावपूर्ण हालात रहे, जो 10 मई को संघर्षविराम के साथ थमे।
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दस्तावेजों से यह भी साफ हुआ है कि पाकिस्तान का यह दावा गलत था कि भारत ने संघर्षविराम की मांग की थी। असल में, नुकसान की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान के सैन्य कमांडरों ने ही युद्धविराम का अनुरोध किया था। भारत की सैन्य ताकत के सामने अधिक नुकसान उठाने की स्थिति में न होने के कारण इस्लामाबाद ने अंतिम विकल्प के तौर पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद मांगी।
बाद में संसद में दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया था कि “ऑपरेशन सिंदूर अभी सक्रिय है और अगर पाकिस्तान ने फिर दुस्साहस किया तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा।” अमेरिकी दस्तावेज यह भी पुष्टि करते हैं कि भारत ने कभी भी अमेरिका से मध्यस्थता की मांग नहीं की, जो ट्रंप के दावों के विपरीत है।
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