पाकिस्तान की एक अदालत ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बेटी राबिया इमरान और उनके पति अली इमरान यूसुफ को एक बड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में “निर्दोष” करार देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
यह फैसला एक ही सुनवाई में सुनाया गया, जिसने इस मामले को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सोमवार (4 मई 2026) को एंटी-करप्शन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एंटी-करप्शन एस्टैब्लिशमेंट (एसीई) ने अदालत को बताया कि राबिया इमरान और अली इमरान यूसुफ के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों का पंजाब साफ पानी कंपनी से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया गया। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
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इस फैसले के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ ने इतनी जल्दी मामले के निपटारे पर सवाल उठाए हैं।
पंजाब साफ पानी कंपनी से जुड़ा यह मामला पहले से ही काफी चर्चित रहा है, जिसमें कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे थे।
अदालत के इस निर्णय के बाद राबिया इमरान और उनके पति को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों और कुछ विश्लेषकों द्वारा आलोचना भी की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह फैसला एसीई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है।
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