भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा है कि देश में महिला क्रिकेट अभी भी विकास और उचित पहचान का इंतजार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दृश्यता (विज़िबिलिटी) अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मिताली राज ने बताया कि महिला खिलाड़ी भी पुरुष खिलाड़ियों की तरह ही समान समय, मेहनत और अनुशासन के साथ खेलती हैं, लेकिन उन्हें उतनी पहचान नहीं मिल पाती जितनी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह असमानता खेल के विकास में एक बड़ी बाधा है।
यह बातें उन्होंने सेल्सफोर्स की ट्रेलब्लेज़िंग वुमन समिट में दक्षिण एशिया की प्रेसिडेंट और सीईओ अरुंधति भट्टाचार्य के साथ बातचीत के दौरान कहीं।
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मिताली राज ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट विकास और पहचान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन खिलाड़ियों को तुरंत परिणामों से प्रेरणा नहीं जोड़नी चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे धैर्य बनाए रखें और निरंतर प्रयास करते रहें।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला क्रिकेट में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसे सही मंच और अधिक अवसरों की जरूरत है। यदि सही समर्थन और संसाधन मिलें, तो भारतीय महिला क्रिकेट विश्व स्तर पर और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।
मिताली राज ने अपने लंबे करियर (2004 से 2022 तक) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन अभी भी लंबा सफर तय करना बाकी है।
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में महिला क्रिकेट को अधिक मीडिया कवरेज, निवेश और दर्शकों का समर्थन मिलेगा, जिससे यह खेल और तेजी से आगे बढ़ेगा।
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