पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू किसान की गोली मारकर हत्या किए जाने से देशभर में अल्पसंख्यक समुदायों में आक्रोश फैल गया है। यह घटना इसी सप्ताह सामने आई, जिसके बाद हिंदू अल्पसंख्यक और मानवाधिकार संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान सरफराज निज़ामानी के रूप में हुई है, जो एक प्रभावशाली ज़मींदार बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपने खेत में काम करने वाले हिंदू किसान किरायेदार कैलाश कोल्ही को सीने में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
घटना के बाद कई हिंदू अल्पसंख्यक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने सिंध में संघीय और स्थानीय सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उसके खिलाफ हत्या और आतंकवाद जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। इसके साथ ही वे पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा देने की भी मांग कर रहे हैं।
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प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने कहा, “सिंध में जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपात कदम उठाए जाने चाहिए।”
पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद नामक अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के अध्यक्ष शिवा कच्छी ने इस हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे “निर्मम और ठंडे दिमाग से की गई हत्या” बताया। उन्होंने कहा, “कैलाश कोल्ही का खून हम सभी से न्याय की मांग करता है। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि सिंध में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों, सुरक्षा और मानवता पर हमला है।”
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में कार्रवाई को लेकर भारत को अल्पसंख्यक अधिकारों पर नसीहत दी थी। भारत ने पाकिस्तान की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड खुद ही बहुत खराब रहा है।
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