बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच कुछ ही घंटों के अंतराल में दो हिंदू पुरुषों—राणा प्रताप बैरागी और शरत मणि चक्रवर्ती—की अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गई। दोनों मामलों में हमलावर पीड़ितों के कार्यस्थलों पर पहुंचे और घातक हमला कर फरार हो गए। इन घटनाओं ने आगामी चुनावों से पहले देश में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
हालांकि, इन हत्याओं के पीछे साम्प्रदायिक कारण की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मुस्लिम-बहुल देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हालिया हिंसक घटनाओं की कड़ी में इन्हें देखा जा रहा है।
राणा प्रताप बैरागी
The Indian Witness के अनुसार, 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी खुलना डिवीजन के जेसोर ज़िले के केशबपुर उपज़िला के अरुआ गांव के निवासी थे। वे कपालिया बाज़ार, मोनिरामपुर में एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और नाराइल से प्रकाशित अख़बार ‘दैनिक बीडी ख़बर’ के कार्यवाहक संपादक भी थे।
सोमवार शाम करीब 5:45 बजे अज्ञात हमलावरों ने उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर कपालिया बाज़ार स्थित एक क्लिनिक के पास ले जाकर सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ कुछ आपराधिक मामले दर्ज थे और हत्या के कारणों की जांच की जा रही है।
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शरत मणि चक्रवर्ती की हत्या
इसी दिन रात करीब 10 बजे, नरसिंदी ज़िले के पलाश उपज़िला स्थित चारसिंदूर बाज़ार में 40 वर्षीय किराना दुकानदार शरत मणि चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल चक्रवर्ती को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। वे अपनी पत्नी और 12 वर्षीय बेटे को छोड़ गए हैं।
पिछले एक महीने में बांग्लादेश में कम से कम छह हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा देश की बदलती राजनीतिक स्थिति में एक गंभीर संकट बनती जा रही है। भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई है।
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