पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दो अलग वित्तीय समझौतों के तहत लगभग 1.2 बिलियन डॉलर की राशि जारी करने के लिए स्टाफ-स्तरीय समझौता किया है। यह समझौता एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (Extended Fund Facility) और रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (Resilience and Sustainability Facility) के तहत हुआ।
इस समझौते के अनुसार, आईएमएफ बोर्ड की मंजूरी मिलने पर पाकिस्तान को एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी के तहत लगभग 1.0 बिलियन डॉलर और रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी के तहत करीब 210 मिलियन डॉलर प्राप्त होंगे। आईएमएफ मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बनाए रखने, संरचनात्मक सुधारों को लागू करने और ऊर्ज़ा की बढ़ती कीमतों से कमजोर समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पाकिस्तान ने 2024 में आईएमएफ के 7 बिलियन डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी कार्यक्रम में शामिल होकर अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, बाजार विश्वास बहाल करने और ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमियों को दूर करने का प्रयास किया। इसके अलावा, पिछले साल देश ने 1.4 बिलियन डॉलर की रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी हासिल की, जिसका उद्देश्य जलवायु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, आपदा प्रबंधन सुधारना, जल संसाधनों की दक्षता बढ़ाना और ग्रीन फाइनेंसिंग को बढ़ावा देना है।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरी संकट में है। उच्च महंगाई, कमजोर मुद्रा और घटती विदेशी मुद्रा भंडार ने घरों और व्यवसायों पर दबाव बढ़ा दिया है। खाद्य, ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतें आम नागरिकों को प्रभावित कर रही हैं। बढ़ता कर्ज और राजस्व का अधिकतर हिस्सा कर्ज भुगतान में खर्च होना विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
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