अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान को औपचारिक रूप से सदस्य बनाया गया है। यह बोर्ड एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित या संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ाना और स्थायी शांति सुनिश्चित करना बताया गया है। इस बोर्ड की परिकल्पना मूल रूप से गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए की गई थी।
भारत उन कई देशों की सूची में शामिल है जिन्हें इस समूह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है, लेकिन अब तक नई दिल्ली की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को ट्रंप और अन्य सदस्यों के साथ मंच साझा करते देखना भारत के लिए असहज माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब भारत बार-बार पाकिस्तान पर सीमा-पार आतंकवाद में संलिप्तता के आरोप लगाता रहा है। इसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले का उल्लेख भी किया जा रहा है।
पाकिस्तान को बोर्ड में शामिल किए जाने पर इज़राइल ने भी कड़ा विरोध जताया है। इस महीने की शुरुआत में भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अजार ने गाजा से जुड़े किसी भी जमीनी मिशन में पाकिस्तानी सेना की भागीदारी को अस्वीकार्य बताया था। उन्होंने कहा कि हमास और पाकिस्तान की धरती से सक्रिय आतंकी संगठनों, जैसे लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर इज़राइल गंभीर रूप से चिंतित है।
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इज़राइल के अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्री निर बरकात ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी संक्रमणकालीन बल या पुनर्निर्माण मिशन में पाकिस्तानी सैनिकों की मौजूदगी स्वीकार्य नहीं होगी।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के पहले चरण में अमेरिका, पाकिस्तान और सऊदी अरब के अलावा अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, पैराग्वे, उज्बेकिस्तान, आर्मेनिया और अज़रबैजान को शामिल किया गया है। यूरोप के कई बड़े देश जैसे फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी, साथ ही रूस और चीन इस बोर्ड से बाहर हैं।
ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे और बोर्ड के चार्टर के अनुसार उन्हें इसके अधीन संस्थाओं के गठन, संशोधन या समाप्ति का विशेष अधिकार प्राप्त होगा।
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