मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मॉब लिंचिंग मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली जिला न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश उस समय दिया, जब न्यायाधीश को फैसले के बाद लगातार धमकियां मिलने की जानकारी सामने आई।
दरअसल, 12 जून को जज तबस्सुम खान ने वर्ष 2022 के मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला 3 अगस्त 2022 का है, जब एक व्यक्ति की कथित तौर पर गो-तस्करी के संदेह में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सभी 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसले के बाद न्यायाधीश तबस्सुम खान को कथित रूप से लगातार धमकियां मिलने लगीं। इसे गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को उनकी सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधीशों की सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। यदि किसी न्यायिक अधिकारी को उसके न्यायिक कार्य के कारण धमकाया जाता है, तो यह न्याय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए न्यायाधीशों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है।
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है और जज तबस्सुम खान को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यह मामला न्यायपालिका की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक अधिकारियों को बिना किसी दबाव या भय के निष्पक्ष निर्णय देने का वातावरण उपलब्ध कराना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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