प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण की दिशा में “ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि देश की माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है और सरकार इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विशेष सत्र की शुरुआत से ही देश महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। उन्होंने एक संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए इस पहल को ऐतिहासिक बताया।
पीएम मोदी 16 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संबोधन देंगे। सूत्रों के अनुसार, वे इस विधेयक को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा भी पेश कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त करना है।
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हालांकि, इस विधेयक को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। विपक्ष ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रावधानों पर चिंता जताते हुए इसका विरोध करने का फैसला किया है।
विपक्षी नेताओं ने संसद सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठक कर संयुक्त रणनीति बनाई। इस बैठक में राहुल गांधी, डीएमके के टी आर बालू, राजद के तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत और अन्य नेता शामिल हुए।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक बड़ा सुधार है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
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