राजस्थान में खांसी की दवा (कफ सिरप) से बच्चों की मौतों को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मंत्री द्वारा इन मौतों को “महज 2-4-5” बताने और इसके लिए माता-पिता की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
मंगलवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान बूंदी से कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने सरकार की मुफ्त दवा योजना से जुड़े एक सवाल में बच्चों की मौतों का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “राजस्थान के अंदर जो भी मौतें हुई हैं… वे, 2-4-5 ही हुई हैं।” इसके अंदर मुख्य कारण यह है कि माता-पिता को जो खांसी की दवा दी गई, उन्होंने वही खुराक अपने छोटे दो साल के बच्चे को दे दी।”
मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे को हल्के में ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “सरकार को कोई चिंता नहीं है। पहले भी वे लापरवाह थे, जिसकी वजह से ये मौतें हुईं।”
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कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामलों में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह दवाओं की गुणवत्ता, वितरण प्रणाली और जागरूकता पर ध्यान दे, न कि सीधे तौर पर माता-पिता को दोषी ठहराए। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और मुफ्त दवा योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को दवा देने में सही खुराक और चिकित्सकीय सलाह बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही सरकार की भी जिम्मेदारी है कि दवाओं के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
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