अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राप्त दान राशि से जुड़े कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी। इस मामले को लेकर राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
यह जांच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू की गई थी। ट्रस्ट ने मंदिर में आने वाले दान से संबंधित कुछ शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की।
एसआईटी में लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। टीम को मामले की गहन जांच कर जल्द से जल्द प्रारंभिक और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
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रविवार को एसआईटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अब तक की जांच के आधार पर तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। हालांकि रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, दस्तावेजों और प्रारंभिक निष्कर्षों का उल्लेख किया गया है।
जांच टीम कथित दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इसके तहत दान संग्रह, लेखा-जोखा, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है।
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अब अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी।
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