सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 17 अक्टूबर तक बंद रखने का फैसला किया गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बाद हवाई सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सऊदी अरब का नागरिक उड्डयन प्राधिकरण सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी करने और हवाई अड्डे की सुविधाओं को दोबारा संचालन के लिए तैयार करने में जुटा है।
सोमवार को जारी विमानन नोटिस के मुताबिक, हवाई अड्डा 17 अक्टूबर को रात 9 बजे जीएमटी तक बंद रहेगा। इससे रियाद आने-जाने वाली उड़ानों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। जेद्दा के बाद यह सऊदी अरब का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार है।
अमेरिका से अधिक मदद मांग रहा सऊदी अरब
सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में अमेरिका की अधिक प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी चाहता है। अब तक अमेरिका खुफिया जानकारी साझा करने, लक्ष्यों की पहचान और अभियान की योजना बनाने में सहायता देता रहा है, लेकिन उसने हूतियों पर सीधे हमले करने से परहेज किया है।
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हालांकि, अमेरिकी सैन्य भागीदारी बढ़ने से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ सकता है। यह लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां व्यवधान से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में भी तनाव के कारण तेल परिवहन पहले से दबाव में है।
रक्षा प्रणाली की विफलता की जांच
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब जांच कर रहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली हूती विद्रोहियों की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में कैसे विफल रही। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि हूतियों ने पहले कई ड्रोन भेजे और फिर रियाद हवाई अड्डे की ओर क्रूज तथा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाले हमलों के लिए समय रहते चेतावनी क्यों नहीं जारी हुई।
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोमवार को दावा किया कि उसने रियाद की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोककर नष्ट कर दिया। सोमवार रात राजधानी में कम से कम तीन विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। अधिकारियों ने बाद में बताया कि तत्काल खतरा टल गया है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय संघर्ष के और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।
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