रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक संदेश या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूसी ने कहा कि रूस हर संभव तरीके से भारत के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का इच्छुक है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद रोकने और अमेरिका तथा संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने दोहराया कि मॉस्को को भारत द्वारा तेल खरीद रोकने से जुड़ा कोई भी आधिकारिक बयान अब तक नहीं मिला है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अमेरिका भारत पर लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ट्रंप प्रशासन ने भारत पर दुनिया के सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक, लगभग 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया था, जिसमें रूसी ऊर्जा खरीद पर 25 प्रतिशत का शुल्क भी शामिल था।
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भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जिससे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन तैयार किए जाते हैं। वर्ष 2021 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी मात्र 0.2 प्रतिशत थी। हालांकि, फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को से दूरी बनाए जाने पर भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई और वह रूस का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले महीने औसतन 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन था। वहीं, इराक और सऊदी अरब से तेल आपूर्ति में हाल के महीनों में वृद्धि दर्ज की गई है।
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