बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने राज्य विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसका कुल आकार 3.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से काफी अधिक है। सरकार ने इस बजट को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के उद्देश्य से तैयार किया है।
वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए 7,724 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह आवंटन राज्य सरकार के “न्याय के साथ विकास” के मूल मंत्र के अनुरूप है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य की कर राजस्व आय लगभग 65,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो आर्थिक स्थिरता की ओर इशारा करता है।
बजट की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए यादव ने कहा कि इसे “ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान” के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया गया था और जिसे सत्तारूढ़ एनडीए के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
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इस योजना के तहत 1.56 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई थी। वित्त मंत्री ने बताया कि जिन महिलाओं ने इस राशि का उपयोग स्वरोजगार या व्यवसाय शुरू करने में किया है, उन्हें आगे चलकर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
इससे पहले पेश किए गए बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जिलों के बीच आय और उपभोग में गहरी असमानताओं की ओर इशारा किया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, पटना प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद (GDDP) के मामले में 1,31,332 रुपये के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि श्योहर, अररिया और सीतामढ़ी जैसे जिले निचले पायदान पर रहे। सर्वे में ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को सरकार की प्राथमिकता बताया गया है।
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