प्रसिद्ध तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता पूमणि का लंबी बीमारी के बाद रविवार रात चेन्नई में निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे। तमिल साहित्य में ग्रामीण जीवन, सामाजिक संघर्ष और दक्षिणी तमिलनाडु के जनजीवन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाले लेखकों में पूमणि की गिनती प्रमुख रूप से की जाती थी।
पूमणि को वर्ष 2014 में उनके चर्चित उपन्यास 'अग्नाडि' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह उपन्यास एक महाकाव्यात्मक कथा के रूप में लिखा गया था, जिसमें दक्षिण तमिलनाडु के सामाजिक इतिहास और सामुदायिक तनावों को दर्शाया गया है। उपन्यास की पृष्ठभूमि में सिवकाशी (1899) और कझुगुमलाई (1895) के सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं को शामिल किया गया था।
पूमणि को विशेष रूप से 'करिसल भूमि' यानी दक्षिणी तमिलनाडु के वर्षा आधारित काली मिट्टी वाले क्षेत्रों के जीवन का सशक्त लेखक माना जाता था। उनकी रचनाओं में ग्रामीण समाज, किसानों की समस्याएं, सामाजिक असमानता और आम लोगों के संघर्षों का वास्तविक चित्रण देखने को मिलता था।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने पूमणि के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके सम्मान में राजकीय सम्मान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पूमणि ने अपनी लेखनी के माध्यम से तमिल संस्कृति और ग्रामीण समाज की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया।
पूमणि के निधन से तमिल साहित्य जगत में शोक की लहर है। साहित्यकारों और पाठकों ने उन्हें एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया, जिन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से समाज के अनदेखे पहलुओं को सामने रखा।
लेखक अपने पीछे पत्नी, दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गए हैं। उनके निधन को तमिल साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए सामाजिक इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज बनी रहेंगी।
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