सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई से पहले उसे कोई जानकारी नहीं दी गई।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में बांग्लादेश के दूतावास ने वहां की जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मांगी थी। सऊदी सरकार ने जो सूची भेजी, उसमें इस पति-पत्नी के नाम शामिल थे, लेकिन उसमें यह उल्लेख नहीं था कि दोनों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। बांग्लादेश को इस मामले की पूरी जानकारी फांसी दिए जाने के बाद ही मिली।
बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले में और जानकारी हासिल करने के लिए सऊदी अरब से संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार का जवाब मिलने के बाद ही बांग्लादेश यह तय करेगा कि आगे किस तरह का कदम उठाया जाए।
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सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों को इस्लामी कानून के तहत 'ताजीर' के नियमों के आधार पर मौत की सजा दी गई। ताजीर एक ऐसी सजा है, जिसकी गंभीरता तय करने का अधिकार न्यायाधीश के पास होता है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों का अपराध गंभीर था और उन्होंने मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया, जिसकी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई।
सऊदी अरब में इस समय 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक रहते और काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या कम वेतन वाली नौकरियों में कार्यरत लोगों की है। दोनों देशों के बीच धार्मिक और आर्थिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं, ऐसे में इस तरह के मामलों में सूचना साझा किए जाने का सवाल अहम हो गया है। बांग्लादेश सरकार फिलहाल सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब में इस साल अब तक करीब 100 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से कई विदेशी नागरिकों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था।
इससे पहले साल 2011 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आठ बांग्लादेशी पुरुषों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। उन्हें मिस्र के एक नागरिक की हत्या का दोषी ठहराया गया था।
इसी महीने सऊदी अरब ने श्रीलंका के एक नागरिक की मौत की सजा रद्द कर दी थी, जिसे फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी को लेकर धर्म का अपमान करने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले को लेकर श्रीलंका में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद कूटनीतिक स्तर पर प्रयास किए गए और अंततः सऊदी अरब ने उस व्यक्ति की मौत की सजा रद्द कर दी।
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