सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी, 2026) को कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम से यह स्पष्ट करने और प्रमाण देने को कहा कि उसने जेल में 25 साल की सजा पूरी कर ली है। यदि उसका यह दावा सही साबित होता है, तो प्रत्यर्पण शर्तों के अनुसार वह जेल से रिहा हो सकता है।
1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जा सकता है और न ही 25 वर्ष से अधिक की सजा दी जा सकती है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सलेम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसके वकील से सवाल किया कि 2005 से 25 साल की गणना कैसे की जा रही है। पीठ ने पूछा, “आप 25 साल की अवधि की गणना किस आधार पर कर रहे हैं?”
और पढ़ें: दो घर, दो ईरान: शाह और उसके विरोधी खुमैनी के घरों की कहानी
सलेम के वकील ने कहा कि उनकी गणना के अनुसार सलेम 25 साल की जेल अवधि पूरी कर चुका है। इस पर अदालत ने पूछा कि उसे वास्तविक हिरासत में किस तारीख को लिया गया था। वकील ने जवाब दिया कि 11 नवंबर 2005 को सलेम को हिरासत में लिया गया था।
पीठ ने आगे पूछा कि क्या इस गणना में अच्छे आचरण पर मिलने वाली छूट (रिमिशन) को भी शामिल किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि सलेम की सजा टाडा (आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत भी है और महाराष्ट्र जेल नियमों के अनुसार यह देखा जाना चाहिए कि ऐसे मामलों में रिमिशन मिलती भी है या नहीं।
अदालत ने सलेम के वकील को दो सप्ताह के भीतर संबंधित जेल नियम रिकॉर्ड पर दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की।
सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सलेम की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि प्रथम दृष्टया 25 साल की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि भारत सरकार पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन के तहत 25 साल की सजा पूरी होने पर सलेम को रिहा करने के लिए बाध्य है।
और पढ़ें: कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को लेकर भारत की वैश्विक पहल