त्रिपुरा के कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दिशा-निर्देशों में बाढ़ को ‘स्थानीय प्राकृतिक आपदा’ की श्रेणी में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य के निचले इलाकों में खेती करने वाले धान उत्पादकों को भारी बारिश और जलभराव के कारण हर वर्ष बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन वर्तमान प्रावधानों के तहत उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल पाता।
कृषि मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा के कई हिस्सों में मानसून के दौरान खेतों में पानी भर जाने से धान की फसल बर्बाद हो जाती है। इससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बाढ़ और जलभराव को भी स्थानीय प्राकृतिक आपदा के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि प्रभावित किसानों को बीमा सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य के निम्न-भूमि वाले क्षेत्रों में धान की खेती व्यापक स्तर पर होती है और भारी वर्षा के दौरान खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलें नष्ट हो जाती हैं। ऐसे मामलों में किसानों को राहत देने के लिए बीमा योजना के दायरे का विस्तार आवश्यक है।
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मंत्री ने कहा कि यदि बाढ़ को इस श्रेणी में शामिल किया जाता है तो किसानों को फसल नुकसान की भरपाई करने में बड़ी मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र को स्थिरता मिलेगी। इससे किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ खेती कर सकेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार करेगी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों के हित में और अधिक प्रभावी बनाएगी।
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