अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तत्कालीन वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक के बीच भारत द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ दरों को लेकर गंभीर मतभेद और तीखी बहस हुई थी। इसका खुलासा न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब Regime Change, Inside the Imperial Presidency of Donald Trump में किया गया है।
किताब के अनुसार, ट्रंप को यह विश्वास था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बहुत अधिक टैरिफ लगाता है। उन्होंने अपने अधिकारियों से बार-बार “सटीक और ठोस आंकड़े” पेश करने को कहा। लेकिन जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा डेटा प्रस्तुत किया गया, तो ट्रंप ने उन आंकड़ों को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि उन्हें गलत जानकारी दी जा रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप का मानना था कि भारत की टैरिफ दरें लगभग 175 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकती हैं, जबकि सरकारी एजेंसियों के आंकड़े इससे काफी कम थे। इस मुद्दे पर कई आंतरिक बैठकों में तनावपूर्ण माहौल देखा गया।
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यह विवाद उस समय सामने आया जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण थे। व्हाइट हाउस ने भारत की टैरिफ नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में प्रवेश करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बाद में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लागू किया। इससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया।
हालांकि, बाद के वर्षों में दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू कीं। फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार की, जिसका उद्देश्य टैरिफ घटाना और बाजार पहुंच बढ़ाना है।
अब दोनों देशों के अधिकारी, जिनमें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं, अंतिम समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं ताकि लंबित मुद्दों का समाधान किया जा सके।
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