अमेरिका में चुनावी साल के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को महंगाई पर काबू पाने वाला नेता बता रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उनके भाषणों और जमीनी आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है। दिसंबर से अब तक अर्थव्यवस्था पर दिए गए पांच भाषणों में ट्रंप ने लगभग 20 बार दावा किया कि महंगाई खत्म हो चुकी है या बहुत कम हो गई है, जबकि करीब 30 बार उन्होंने कहा कि कीमतें गिर रही हैं।
हालांकि आधिकारिक आंकड़े और आम लोगों का अनुभव इस दावे से मेल नहीं खाते। पिछले एक साल में महंगाई लगभग 3% के आसपास रही है और कई जरूरी चीजों की कीमतें अब भी ऊंची हैं। उदाहरण के तौर पर, ट्रंप के पद संभालने के बाद से ग्राउंड बीफ की कीमत 18% और कॉफी की कीमत 29% तक बढ़ चुकी है।
रिपब्लिकन रणनीतिकारों का मानना है कि ट्रंप का यह विरोधाभासी संदेश उनकी विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है, खासकर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले। एक सर्वे के मुताबिक, केवल 35% अमेरिकी ट्रंप की आर्थिक नीतियों से संतुष्ट हैं।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ट्रंप अपने भाषणों में महंगाई के अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी भटक जाते हैं। करीब पांच घंटे के भाषणों में उन्होंने लगभग दो घंटे अलग-अलग विषयों—जैसे अवैध प्रवासन, विदेश नीति और मीडिया—पर बिताए।
हालांकि ट्रंप ने कुछ आर्थिक समाधान भी पेश किए हैं, जिनमें टैक्स कटौती, टिप और ओवरटाइम पर टैक्स हटाने, मॉर्गेज दरें घटाने और दवाओं की कीमत कम करने जैसे कदम शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनका असर लंबी अवधि में दिख सकता है, लेकिन चुनाव से पहले जीवनयापन की लागत पर बड़ा असर होने की संभावना कम है।
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