अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24\07\2026 से भारत, यूरोपीय संघ, चीन सहित 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत तक के नए शुल्क (टैरिफ) लागू कर दिए। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ये देश जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं। यह फैसला उस अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद लागू किया गया है, जिसे पहले सीमित समय के लिए लागू किया गया था।
व्हाइट हाउस का यह कदम ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत लगाए गए 10 से 50 प्रतिशत तक के तथाकथित ‘पारस्परिक शुल्क’ (रिसिप्रोकल टैरिफ) को निरस्त कर दिया था। नए शुल्क 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत लगाए गए हैं, जिससे प्रशासन को लगभग सभी आयातित वस्तुओं पर न्यूनतम शुल्क बनाए रखने का कानूनी आधार मिल गया है।
हालांकि, नए टैरिफ में कई उत्पादों को छूट भी दी गई है। इनमें तेल और गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य पदार्थ, विमान और उनके पुर्जे, महत्वपूर्ण खनिज तथा पहले से राष्ट्रीय सुरक्षा शुल्क के दायरे में आने वाले ऑटोमोबाइल, इस्पात, एल्युमीनियम और तांबा शामिल हैं।
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अमेरिका ने भारत, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका समेत कई देशों के उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है। वहीं यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्विट्जरलैंड के लिए कुल शुल्क 10 या 12.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। चीन, वियतनाम सहित 38 अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लागू किया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू करता रहा है और अब अन्य देशों को भी इसी दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार, यह निर्णय मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
दूसरी ओर, चीन ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वह एकतरफा शुल्कों का विरोध करता है और व्यापार युद्ध किसी भी पक्ष के हित में नहीं होते। ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील और नॉर्वे ने भी इन शुल्कों को अनुचित बताते हुए इन्हें हटाने की मांग की है।
यूरोपीय आयोग ने कहा कि नए शुल्क पहले हुए अमेरिका-यूरोपीय संघ समझौते की सीमा के अनुरूप हैं, जिससे भविष्य में और व्यापारिक सहयोग की संभावना बनी हुई है। ब्रिटेन ने भी कहा कि उसके साथ हुए व्यापार समझौते पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और व्हिस्की तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी उत्पादों पर शून्य शुल्क जैसी सुविधाएं जारी रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए शुल्कों से वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। हालांकि वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया सीमित रही, क्योंकि निवेशकों का ध्यान पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर अधिक केंद्रित रहा। इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नए टैरिफ से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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