कई दिनों तक चली गहन वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों के बाद अमेरिका और ईरान ने मध्य पूर्व में तीन महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने फ्रांस के वर्साय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी समझौते को डिजिटल रूप से मंजूरी दी।
वर्साय से रवाना होते समय डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। मैंने अभी वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए हैं।” वहीं ईरान ने भी समझौते की पुष्टि की, लेकिन इसे अमेरिका की नीतियों की विफलता का प्रमाण बताया। हालांकि तेहरान ने यह भी कहा कि अब असली चुनौती समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का पाठ राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षरों के साथ अंतिम रूप ले चुका है। अब इसके क्रियान्वयन की परीक्षा होगी।” समझौते के तहत दोनों देशों को अंतिम शर्तों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है।
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इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। समझौते के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में भी राहत देगा।
इसके अलावा अंतिम समझौते के बाद क्षेत्रीय देशों के सहयोग से 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष को जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी विवाद का विषय बना हुआ है। समझौते के अनुसार ईरान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करना होगा।
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