अमेरिकी सीनेट ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक 86-11 मतों से भारी बहुमत के साथ पारित कर दिया। अब यह विधेयक प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जहां कांग्रेस के ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण सितंबर में मतदान होने की संभावना है।
2026 के लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम के नाम से पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिकी सांसदों का दावा है कि रूस से तेल और गैस की खरीद से मास्को को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक मदद मिल रही है। इस कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने रूस पर कड़े प्रतिबंधों की जोरदार वकालत की थी।
विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से आयात होने वाले तेल और गैस समेत अन्य उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। इनमें चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं।
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इसका सीधा असर भारत और चीन पर पड़ सकता है, क्योंकि दोनों देश रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं। विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाने का प्रावधान है।
डेमोक्रेट सांसदों ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस पर जवाबदेही तय करने के बजाय ट्रंप की शुल्क नीति और व्यापार युद्ध को बढ़ावा मिल सकता है।
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