अमेरिका ने एक बार फिर कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त एक नाव पर हवाई हमला किए जाने की पुष्टि की है, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। इस ताज़ा हमले के साथ ही सितंबर 2025 से चल रहे इस अभियान में मारे गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 243 हो गई है।
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के मक़सद से किए जा रहे हैं और निशाना बनाई गई नावें नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थीं। हालांकि इस पूरे अभियान को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या मुकदमे के इस तरह सीधे हमला करके लोगों को मार देना न्यायेतर हत्या (एक्स्ट्राजुडिशियल किलिंग) के दायरे में आता है।
सितंबर 2025 में शुरू हुए इस सैन्य अभियान के तहत अमेरिका लगातार ऐसी नावों पर हमले करता आ रहा है, जिन्हें वह मादक पदार्थ तस्करी से जोड़कर देखता है। हर हमले के बाद अमेरिकी पक्ष की ओर से यह जानकारी सार्वजनिक की जाती रही है कि कितने लोग मारे गए, लेकिन मृतकों की पहचान, उनकी राष्ट्रीयता या इस बात के पुख्ता प्रमाण सार्वजनिक तौर पर शायद ही साझा किए जाते हैं कि वे वास्तव में तस्करी गतिविधि में संलिप्त थे।
और पढ़ें: बेंगलुरु में डीआरडीओ के 47 वर्षीय वैज्ञानिक की मौत, परिवार ने कार्यस्थल पर तनाव का लगाया आरोप
मानवाधिकार संगठनों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस अभियान पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि समुद्र में संदिग्ध नावों पर सीधे घातक बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानकों के विपरीत है, क्योंकि इसमें आरोपितों को अपनी सफाई देने या अदालत में पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं मिलता। आलोचकों का तर्क है कि भले ही कोई व्यक्ति तस्करी में शामिल हो, लेकिन उसे बिना सुनवाई के मार देना न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन है।
पिछले कुछ महीनों में हुए इन हमलों की संख्या और इनमें मारे गए लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है। 243 लोगों की मौत के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने इस अभियान को जारी रखने का संकेत दिया है, जबकि इसकी वैधता और नैतिकता को लेकर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे।
फिलहाल इस ताज़ा हमले में मारे गए पांच लोगों की पहचान या नाव की सटीक लोकेशन को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यह मामला आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कानूनी हलकों में और अधिक बहस को जन्म दे सकता है।
और पढ़ें: नवाचार में साहस दिखाएं, दुनिया का नेतृत्व करें’: भविष्य की तकनीकों पर पीएम मोदी का भारत से आह्वान