अमेरिका ने इराक में अपनी सैन्य मौजूदगी का एक बड़ा अध्याय समाप्त कर दिया है। पेंटागन के अनुसार, बुधवार, 30 सितंबर 2026 को आखिरी अमेरिकी सैनिकों ने इराक छोड़ दिया। यह वापसी 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए किए गए अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान के 23 साल बाद हुई है। अंतिम अमेरिकी सैनिकों ने उत्तरी इराक के स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में स्थित एरबिल एयरबेस से प्रस्थान किया।
अमेरिका और इराक के बीच हुए समझौते के तहत यह वापसी पूरी की गई। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इसे व्यवस्थित सैन्य वापसी बताया। उन्होंने कहा कि इराक में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के खिलाफ 12 साल तक चले अमेरिकी सैन्य अभियान का अंत हो गया है। हालांकि, अमेरिका इराकी सुरक्षा बलों को सीमित प्रशिक्षण और खुफिया सहायता देता रहेगा।
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी अब मुख्य रूप से इराकी सुरक्षा बलों पर होगी। बगदाद ने इसे देश की संप्रभुता और सुरक्षा क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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हालांकि, अमेरिकी वापसी को लेकर इराक में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों ने इसे अपनी जीत के तौर पर देखा है, जबकि कुछ इराकी और कुर्द अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं। उनका डर है कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त होने से सुरक्षा में खालीपन पैदा हो सकता है और इन मिलिशिया का प्रभाव बढ़ सकता है।
एक अन्य चुनौती आईएसआईएस के बचे हुए नेटवर्क से जुड़ी है। संगठन ने 2014 में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। बाद में अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान ने उसके क्षेत्रीय नियंत्रण को खत्म किया, लेकिन संगठन के अवशेष अब भी मौजूद हैं। इराकी सुरक्षा बलों को आगे इनसे निपटने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
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