वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने कहा है कि अक्टूबर 2025 के बाद से उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कोई बातचीत नहीं हुई है। मचाडो ने यह बयान सोमवार (5 जनवरी 2026) को एक साक्षात्कार के दौरान दिया।
उन्होंने कहा, “असल में मेरी राष्ट्रपति ट्रंप से आखिरी बातचीत 10 अक्टूबर को हुई थी, उसी दिन जब नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की गई थी। उसके बाद से हमारी कोई बात नहीं हुई है।” मचाडो को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उस संघर्ष के लिए दिया गया, जिसे नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेजुएला में ‘तानाशाही’ के खिलाफ लड़ाई करार दिया है।
मारिया कोरिना मचाडो को अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सबसे मजबूत और विश्वसनीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। वह पिछले महीने वेनेजुएला से नॉर्वे गई थीं, जहां उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार ग्रहण किया। इसके बाद से वह अब तक अपने देश वापस नहीं लौटी हैं।
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अपने वेनेजुएला लौटने की योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर मचाडो ने कहा, “मैं जितनी जल्दी संभव हो सके, अपने देश वापस जाने की योजना बना रही हूं।” यह साक्षात्कार ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई करते हुए वहां के राष्ट्रपति को हिरासत में लिया।
मचाडो ने अमेरिका की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे “मानवता, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के लिए एक बड़ा कदम” बताया। हालांकि, सोमवार को वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई, लेकिन अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद देश के भविष्य के नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मचाडो के साथ काम करने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें देश के भीतर न तो पर्याप्त समर्थन है और न ही सम्मान।
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