सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक अच्छा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यदि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो छात्रों के प्रदर्शन की दिशा आगे चलकर अनिश्चित हो सकती थी।
भगवानराव दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक सकारात्मक निर्णय है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों और उनकी मांगों को देखते हुए यह कदम जरूरी था।
भगवानराव दीपके ने कहा कि छात्रों की भावनाओं को समझना और उनकी चिंताओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाया जाता तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता था और उसकी दिशा को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता था।
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही थी। नई दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को अंतरिम रूप से शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सीजेपी की ओर से शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। संगठन ने सरकार से कई मांगें रखी थीं और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
भगवानराव दीपके ने कहा कि सरकार के इस फैसले से छात्रों के बीच सकारात्मक संदेश गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि छात्रों के हित और परीक्षा प्रणाली में सुधार उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
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