पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की।
अभिषेक बनर्जी के साथ वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, महुआ मोइत्रा और सौगत रॉय भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष को 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपीं और दावा किया कि बागी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के खिलाफ है।
मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इन सांसदों ने स्वेच्छा से टीएमसी की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें संसद की सदस्यता बनाए रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में न्यायपूर्ण निर्णय लेंगे।
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अभिषेक बनर्जी ने एनसीपीआई के अस्तित्व और उसके साथ कथित विलय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों ने पहले अलग समूह के रूप में मान्यता मांगी और बाद में किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का दावा किया। उन्होंने कहा, "इस पार्टी के बारे में न जनता जानती है और न ही पहले ये सांसद जानते थे।"
टीएमसी नेता ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि जिस पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए हों, यदि वे बाद में किसी दूसरी पार्टी का समर्थन या सदस्यता स्वीकार करते हैं तो वे अयोग्यता के दायरे में आते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दो-तिहाई सदस्यों के विलय संबंधी प्रावधान पूरे राजनीतिक दल पर लागू होते हैं, केवल संसदीय दल पर नहीं। इसी आधार पर टीएमसी ने सभी 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं।
अब इस पूरे मामले पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
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