एआई (Artificial Intelligence) आधारित लेखन भले ही कॉलेज के निबंधों को बेहतर और आकर्षक बना सकता है, लेकिन यह अत्यधिक चयनात्मक (highly selective) कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
हाल के समय में कई छात्र यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि जनरेटिव एआई कुछ ही सेकंड में प्रभावशाली और भावनात्मक लेखन तैयार कर सकता है, तो फिर स्वयं निबंध लिखने का क्या महत्व रह जाता है? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे कॉलेज एडमिशन के परिणामों पर कोई असर पड़ता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई भाषा को सुधार सकता है, वाक्यों को अधिक सुगठित और आकर्षक बना सकता है, लेकिन यह उस व्यक्तिगत अनुभव और भावनात्मक संदर्भ को नहीं बना सकता, जो एक वास्तविक कॉलेज निबंध की आत्मा होता है।
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कॉलेजों में प्रवेश देने वाली चयन समितियाँ केवल सुंदर भाषा नहीं देखतीं, बल्कि वे यह समझना चाहती हैं कि छात्र की सोच, उसका व्यक्तित्व, उसकी चुनौतियाँ और जीवन के अनुभव क्या हैं। एआई द्वारा लिखा गया निबंध अक्सर तकनीकी रूप से मजबूत होता है, लेकिन उसमें व्यक्तिगत गहराई और मौलिकता की कमी हो सकती है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि कोई छात्र पूरी तरह एआई पर निर्भर होकर निबंध लिखता है, तो वह अपने वास्तविक स्वर (authentic voice) को खो सकता है, जो प्रवेश प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए सलाह दी जाती है कि एआई का उपयोग केवल सहायता उपकरण (support tool) के रूप में किया जाए, न कि पूरी तरह लेखन के विकल्प के रूप में। छात्रों को अपने अनुभव, विचार और भावनाओं को स्वयं व्यक्त करना चाहिए ताकि उनका निबंध वास्तविक और प्रभावशाली बना रहे।
अंततः, कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया में मौलिकता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति आज भी सबसे महत्वपूर्ण मानदंडों में से एक बनी हुई है।
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