रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को सैन्य तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि आकाश मिसाइल सिस्टम का निर्यात भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और स्वदेशी तकनीक की सफलता की प्रमुख कहानियों में शामिल है।
राजेश कुमार सिंह के अनुसार, भारत ने आकाश मिसाइल प्रणाली का निर्यात आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को किया है। उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित इस प्रणाली को देश की रक्षा तकनीक में बढ़ती क्षमताओं का उदाहरण बताया।
आकाश मिसाइल प्रणाली भारत में विकसित एक जमीन से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसे भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। स्वदेशी प्रणाली के विकास से भारत की विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को भी मजबूती मिली है।
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रक्षा सचिव ने कहा कि आकाश की सफलता केवल देश की सुरक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भी अवसर पैदा हुए हैं। मित्र देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात भारत के बढ़ते रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत घरेलू कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों द्वारा विकसित प्रणालियों को भारतीय सेनाओं में शामिल करने के साथ-साथ विदेशों में निर्यात करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आकाश मिसाइल सिस्टम की निर्यात सफलता को इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे भारत के रक्षा उद्योग को नए बाजार मिलने और स्वदेशी सैन्य तकनीक के वैश्विक स्तर पर विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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