उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित मतदाताओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दलित और संविधान से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीतिक रणनीति में प्रमुखता दी है। हालिया पार्टी बैठकों में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और मतदाताओं से सीधे संपर्क पर जोर दिया गया है।
अखिलेश यादव ने पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद कहा कि सपा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अपने वोट में 27 हजार की बढ़ोतरी के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं समझेंगे और न्याय व सम्मान से जुड़े मुद्दे उठाएंगे।
सपा की रणनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाना भी शामिल है। पार्टी नेतृत्व ने हाल के दिनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। अखिलेश यादव ने दावा किया है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 72 जिलों में आंबेडकर की 151 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया। ये आंकड़े और आरोप सपा अध्यक्ष की ओर से दिए गए हैं।
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सपा ने अपने छात्र संगठन की पोशाक में नीले रंग को भी शामिल किया है। अखिलेश यादव ने इसे डॉ. आंबेडकर, संविधान और सामाजिक न्याय से जोड़कर पेश किया है।
वहीं, भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव की रणनीति पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा के कार्यकाल में दलितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अखिलेश के नीले रंग के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और राजनीतिक दलों ने अभी से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संगठन और जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है।
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