केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर राज्य की जनता और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय से ही एक प्रमुख संकल्प रहा है और यह कानून देश में समानता तथा न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
असम विधानसभा ने बुधवार को लंबी बहस और विपक्ष के भारी विरोध के बीच यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी कानून लागू करने वाला तीसरा राज्य बन गया। गोवा में पहले से ही समान नागरिक कानून लागू है, जो पुर्तगाली शासनकाल से चला आ रहा है।
अमित शाह ने कहा कि भाजपा हमेशा से “एक राष्ट्र, एक कानून” की अवधारणा का समर्थन करती रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय समान अधिकार और समान कानूनी सुरक्षा देना है।
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इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है। साथ ही बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करने का भी प्रावधान किया गया है। कानून में बहुविवाह के मामलों में सात साल तक की सजा और लिव-इन संबंध पंजीकृत नहीं कराने पर तीन महीने तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।
हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद ध्वनिमत से बिल पारित कर दिया गया।
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