कारगिल विजय दिवस के अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को गुवाहाटी के दिघलीपुखुरी स्थित राज्य युद्ध स्मारक पहुंचकर वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यपाल ने युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद जवानों के प्रति अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि देश उनकी वीरता और बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।
कार्यक्रम में सेना के अधिकारी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके अदम्य साहस को नमन किया।
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राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सैनिकों के अद्वितीय त्याग का स्मरण कराने वाला दिन भी है। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया और दुश्मनों को परास्त कर देश का गौरव बढ़ाया। ऐसे वीर सपूतों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
हर वर्ष 26 जुलाई को पूरे देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इस दिन वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल की दुर्गम चोटियों से घुसपैठियों को खदेड़कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। देशभर में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों के अदम्य साहस और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है।
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